भारत में डिजिटल क्रांति का पहिया जिस तेजी से घूम रहा है, उसकी कल्पना शायद ही किसी ने एक दशक पहले की होगी। हम उस दौर से निकलकर अब उस मुकाम पर आ खड़े हुए हैं जहां इंटरनेट सिर्फ ‘चलना’ नहीं चाहिए, बल्कि ‘दौड़ना’ चाहिए। हाल ही में आई ओपन सिग्नल (OpenSignal) की रिपोर्ट ने भारतीय टेलीकॉम बाजार में एक बार फिर हलचल मचा दी है। इस रिपोर्ट ने साफ लफ्जों में मुहर लगा दी है कि मुकेश अंबानी की अगुवाई वाली रिलायंस जियो (Reliance Jio) भारत का निर्विवाद 5G नेटवर्क चैंपियन बनकर उभरा है।

यह रिपोर्ट सिर्फ आंकड़ों का खेल नहीं है, बल्कि यह उस भरोसे की कहानी है जो करोड़ों भारतीयों ने इस नेटवर्क पर दिखाया है। आइए, इस रिपोर्ट की गहराई में उतरते हैं और समझते हैं कि आखिर जियो ने बाजी कैसे मारी और आम आदमी के लिए इसके क्या मायने हैं।

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रफ़्तार का सौदागर: डाउनलोड स्पीड में जियो की बादशाहत

जब हम 5G की बात करते हैं, तो सबसे पहला सवाल यही होता है—”स्पीड कितनी है?” ओपन सिग्नल की रिपोर्ट के मुताबिक, जियो ने डाउनलोड स्पीड के मामले में अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी एयरटेल को काफी पीछे छोड़ दिया है। रिपोर्ट बताती है कि जियो यूजर्स को जो औसत डाउनलोड स्पीड मिल रही है, वह किसी चमत्कार से कम नहीं है।

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जहां एयरटेल अपनी नॉन-स्टैंडअलोन (NSA) तकनीक के साथ संघर्ष करता दिख रहा है, वहीं जियो ने अपनी स्टैंडअलोन (SA) तकनीक के दम पर स्पीड का एक नया मानक स्थापित कर दिया है। इसका सीधा असर यह है कि अब बड़ी से बड़ी फाइलें चुटकियों में डाउनलोड हो रही हैं। बफरिंग शब्द धीरे-धीरे हमारे शब्दकोश से गायब होता जा रहा है।

ओपन सिग्नल के आंकड़ों ने साफ कर दिया है कि डाउनलोड स्पीड के मामले में रिलायंस जियो अपने प्रतिद्वंद्वियों से मीलों आगे निकल चुका है, जो डिजिटल भारत की नई तस्वीर पेश करता है।

उपलब्धता का खेल: कहां-कहां है नेटवर्क?

स्पीड होना एक बात है, लेकिन नेटवर्क का मिलना दूसरी और सबसे अहम बात है। अगर आपके फोन में 5G का निशान ही नहीं आ रहा, तो स्पीड का आप क्या करेंगे? यहां भी जियो ने बाजी मार ली है। ‘अवेलेबिलिटी’ यानी उपलब्धता के मामले में जियो का ग्राफ बहुत ऊंचा है।

रिपोर्ट के अनुसार, जियो यूजर्स अपना अधिकांश समय 5G नेटवर्क पर बिता रहे हैं। इसका मतलब है कि जब आप घर से बाहर निकलते हैं, ऑफिस जाते हैं, या किसी सफर पर होते हैं, तो आपका फोन बार-बार 4G पर गिरने के बजाय 5G पर बना रहता है। यह निरंतरता ही असली यूजर एक्सपीरियंस है। एयरटेल के यूजर्स को अभी भी कई इलाकों में नेटवर्क स्विचिंग की समस्या से जूझना पड़ रहा है, जबकि जियो ने अपने टावरों का जाल इतनी सघनता से बिछाया है कि ‘नो नेटवर्क’ की शिकायतें कम होती जा रही हैं।

तकनीक का अंतर: SA बनाम NSA

आम यूजर शायद इस तकनीकी पेंच को न समझे, लेकिन जियो की इस जीत के पीछे सबसे बड़ा कारण उसकी तकनीकी रणनीति है। जियो ने शुरुआत से ही ‘स्टैंडअलोन 5G’ (Standalone 5G) पर दांव खेला, जबकि अन्य कंपनियों ने 4G के ढांचे पर ही 5G को खड़ा करने की कोशिश की (NSA)।

स्टैंडअलोन आर्किटेक्चर का मतलब है कि जियो के पास 5G के लिए एक समर्पित हाईवे है, जिस पर 4G का ट्रैफिक नहीं चलता। यही कारण है कि नेटवर्क पर भारी लोड होने के बावजूद जियो की स्पीड स्थिर रहती है।

नेटवर्क की उपलब्धता यानी ‘अवेलेबिलिटी’ में जियो का दबदबा कायम है, जिसका सीधा मतलब है कि यूजर्स को बार-बार 4G पर स्विच नहीं करना पड़ता और उन्हें निर्बाध इंटरनेट मिलता है।

वीडियो और गेमिंग का बदलता अनुभव

आज का युवा सिर्फ चैटिंग नहीं करता, वह गेमिंग करता है, रील बनाता है और 4K वीडियो स्ट्रीम करता है। ओपन सिग्नल की रिपोर्ट ने वीडियो एक्सपीरियंस में भी जियो को बेहतर आंका है। पहले जब हम हाई-डेफिनिशन वीडियो देखते थे, तो लोडिंग का गोला घूमता रहता था, लेकिन अब जियो 5G ने उसे इतिहास बना दिया है।

गेमर्स के लिए तो यह किसी वरदान से कम नहीं है। लेटेंसी (Latency) कम होने के कारण पबजी (PUBG) या बीजीएमआई (BGMI) जैसे गेम्स में जो रिस्पॉन्स टाइम मिल रहा है, वह शानदार है। लैग-फ्री गेमिंग ने ई-स्पोर्ट्स के प्रति भारतीय युवाओं का रुझान और बढ़ा दिया है।

आम आदमी पर असर और डेटा की भूख

इस रिपोर्ट का एक पहलू यह भी है कि भारत में डेटा की खपत आसमान छू रही है। जियो के मुफ्त वेलकम ऑफर और अब किफायती 5G प्लान्स ने लोगों की डेटा की भूख को बढ़ा दिया है। एक सब्जी वाले से लेकर कॉर्पोरेट एग्जीक्यूटिव तक, हर कोई हाई-स्पीड इंटरनेट का इस्तेमाल अपने काम को आसान बनाने के लिए कर रहा है।

प्रतिस्पर्धा की बात करें तो वोडाफोन-आइडिया (Vi) अभी भी 5G की दौड़ में बहुत पीछे नजर आता है। उनकी देरी का सीधा फायदा जियो और एयरटेल को मिला है, लेकिन जियो ने आक्रामक विस्तार नीति अपनाकर सबसे बड़ा हिस्सा अपने नाम कर लिया है।

कवरेज: शहर से गांव तक

जियो की सफलता का एक बड़ा कारण उसका कवरेज विस्तार है। रिपोर्ट बताती है कि जियो सिर्फ मेट्रो शहरों तक सीमित नहीं है। टियर-2 और टियर-3 शहरों में भी जियो का 5G नेटवर्क मजबूती से काम कर रहा है।

वीडियो अनुभव और गेमिंग के क्षेत्र में भी 5G ने भारतीय उपभोक्ताओं की आदतों को पूरी तरह बदल दिया है, जिसमें जियो एक प्रमुख उत्प्रेरक बनकर उभरा है।

डिजिटल इंडिया का सपना तभी पूरा होगा जब गांव का छात्र भी उसी स्पीड से पढ़ाई कर सके जिससे शहर का छात्र करता है। जियो इस खाई को पाटने में सबसे आगे दिखाई दे रहा है।

क्या है भविष्य?

ओपन सिग्नल की यह रिपोर्ट सिर्फ जियो की तारीफ नहीं है, बल्कि यह भारतीय टेलीकॉम सेक्टर की बदलती तस्वीर का आईना है। यह बताता है कि इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश और सही तकनीकी चयन का फल मीठा होता है। हालांकि, अभी भी सुधार की गुंजाइश है। कॉल ड्रॉप और इनडोर कवरेज (इमारतों के अंदर नेटवर्क) पर काम होना बाकी है।

लेकिन फिलहाल के लिए, अगर आपके पास 5G फोन है और आप भारत में सबसे तेज इंटरनेट अनुभव चाहते हैं, तो आंकड़े और रिपोर्ट एक ही दिशा में इशारा कर रहे हैं—और वह दिशा रिलायंस जियो की है।

आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि एयरटेल अपनी रणनीति में क्या बदलाव करता है, लेकिन अभी के लिए, ‘जियो धन धना धन’ की गूंज 5G के मैदान में सबसे तेज सुनाई दे रही है।

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