बिहार की राजनीति में सन्नाटा महज एक भ्रम होता है; असल में यह किसी बड़े तूफान से पहले की खामोशी होती है। अभी पटना की फिजाओं में सियासी पारा चढ़ा हुआ है, और इसकी वजह कोई चुनावी रैली नहीं, बल्कि एक ‘चिट्ठी’ है। यह चिट्ठी लिखी है राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के कद्दावर नेता और लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे, तेज प्रताप यादव ने। जिसे संबोधित किया गया है, वह कोई और नहीं बल्कि मौजूदा सरकार में उनके सबसे धुर विरोधी माने जाने वाले, बिहार के उपमुख्यमंत्री और गृह मंत्री सम्राट चौधरी हैं।
तेज प्रताप यादव, जो अक्सर अपने बेबाक और कभी-कभी अलहदा अंदाज के लिए सुर्खियों में रहते हैं, इस बार बेहद संजीदा हैं। उनके शब्दों में डर की आहट है और मांग है—अपनी जान की हिफाजत की। उन्होंने सम्राट चौधरी को लिखे पत्र में एक पूर्व जेडीयू नेता से अपनी जान को खतरा बताया है। यह मामला महज एक वीआईपी सुरक्षा का नहीं, बल्कि बिहार के बदलते शक्ति संतुलन और पुरानी रंजिशों का एक नया अध्याय है।
क्या लिखा है उस गोपनीय पत्र में?
सूत्रों के हवाले से जो खबरें छनकर बाहर आ रही हैं, वह काफी चौंकाने वाली हैं। तेज प्रताप यादव ने अपने पत्र में केवल सुरक्षा की मांग नहीं की है, बल्कि विस्तार से उन परिस्थितियों का जिक्र किया है, जिसके चलते वे असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया है कि एक पूर्व जेडीयू नेता, जिनका नाम सार्वजनिक पटल पर अभी गोपनीय रखा गया है, उनके खिलाफ साजिश रच रहे हैं।
बताया जा रहा है कि तेज प्रताप ने उस नेता और उनके गुर्गों द्वारा की जा रही संदिग्ध गतिविधियों का ब्योरा दिया है। यह खतरा केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि व्यक्तिगत स्तर पर बताया जा रहा है। तेज प्रताप का कहना है कि उन्हें और उनके सहयोगियों को डराने-धमकाने की कोशिशें तेज हो गई हैं। बिहार की राजनीति में ‘बाहुबल’ और ‘बदले की भावना’ का इतिहास पुराना रहा है, इसलिए इस पत्र को प्रशासन कतई हल्के में लेने के मूड में नहीं है।
Main Point: मुख्य बिंदु: तेज प्रताप यादव ने सीधे तौर पर डिप्टी सीएम और गृह मंत्री सम्राट चौधरी को संबोधित करते हुए पत्र लिखा है, जो दर्शाता है कि वे इस मामले को प्रशासनिक के साथ-साथ राजनीतिक स्तर पर भी उठाना चाहते हैं और सरकार को जवाबदेह बनाना चाहते हैं।
सम्राट चौधरी: कसौटी पर गृह मंत्री
अब गेंद सम्राट चौधरी के पाले में है। सम्राट चौधरी, जो अपनी कड़क छवि और सिर पर बंधी पगड़ी (मुरैठा) के लिए जाने जाते हैं, के सामने एक धर्मसंकट भी है और एक अवसर भी। धर्मसंकट यह कि शिकायतकर्ता विपक्ष का एक बड़ा चेहरा है, और अवसर यह कि वे अपनी प्रशासनिक निष्पक्षता साबित कर सकें।
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राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि सम्राट चौधरी इस मामले में कोई कोताही नहीं बरतेंगे। यदि तेज प्रताप यादव के साथ कोई अनहोनी होती है, तो उसका सीधा दाग राज्य की ‘एनडीए सरकार’ और गृह विभाग पर लगेगा। इसलिए, माना जा रहा है कि राजनीतिक मतभेदों को दरकिनार करते हुए सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जा सकते हैं।
वह ‘अज्ञात’ नेता और वर्चस्व की जंग
सबसे बड़ा सवाल जो हर किसी की जुबान पर है—आखिर वह पूर्व जेडीयू नेता कौन है? तेज प्रताप ने पत्र में जिस व्यक्ति की ओर इशारा किया है, कहा जा रहा है कि वह पाला बदल चुका है या फिर किसी क्षेत्र विशेष में अपनी समानांतर सत्ता चलाता है। बिहार में अक्सर देखा गया है कि जब सत्ता परिवर्तन होता है, तो स्थानीय स्तर पर ‘ठेकेदारी’, ‘जमीन विवाद’ और ‘वर्चस्व’ की लड़ाइयां तेज हो जाती हैं।
जानकारों की मानें तो यह विवाद किसी पुरानी रंजिश का नतीजा हो सकता है। हो सकता है कि तेज प्रताप के किसी फैसले या उनके किसी करीबी के चलते उस नेता के हितों पर चोट पहुंची हो, जिसका बदला अब लेने की कोशिश की जा रही हो। नाम का खुलासा न होना इस रहस्य को और गहरा रहा है।
पुलिस महकमे में हड़कंप और जांच
जैसे ही यह ‘लेटर बम’ फूटा, पटना पुलिस और खुफिया विभाग हरकत में आ गए। पुलिस मुख्यालय के सूत्रों के अनुसार, मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए प्रारंभिक जांच शुरू कर दी गई है। स्थानीय थाने से इनपुट मांगा गया है कि क्या तेज प्रताप के आवास या उनके काफिले के आसपास कोई संदिग्ध गतिविधि देखी गई है?
वीआईपी सुरक्षा (VIP Security) का अपना एक प्रोटोकॉल होता है। किसी के कहने भर से सुरक्षा नहीं बढ़ाई जाती, बल्कि उसके लिए खतरे का आकलन (Threat Assessment) किया जाता है। खुफिया विभाग (Intelligence Bureau) की रिपोर्ट यह तय करेगी कि खतरा कितना वास्तविक है।
Main Point: मुख्य बिंदु: पुलिस प्रशासन खतरे का आकलन (Threat Assessment) कर रहा है ताकि यह तय किया जा सके कि यह डर वास्तविक है या महज कोई राजनीतिक स्टंट। जांच रिपोर्ट के आधार पर ही सुरक्षा की श्रेणी (Security Category) बढ़ाई या घटाई जाएगी।
तेज प्रताप का ‘सीरियस अवतार’
हम अक्सर तेज प्रताप को वृंदावन की गलियों में, साइकिल चलाते हुए या सोशल मीडिया पर रील बनाते हुए देखते हैं। लेकिन इस बार उनका लहजा बदला हुआ है। उन्होंने साफ कर दिया है कि यह मुद्दा उनकी निजी सुरक्षा का है। यह कदम एक तरह से सरकार पर दबाव बनाने की रणनीति भी हो सकती है।
विपक्ष लगातार आरोप लगा रहा है कि जब से बिहार में एनडीए की वापसी हुई है, विपक्षी नेताओं की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। तेजस्वी यादव की सुरक्षा में कटौती का मुद्दा भी पहले गरमाया था। अब तेज प्रताप के इस पत्र ने उस नैरेटिव को और हवा दे दी है कि मौजूदा सरकार में विपक्ष सुरक्षित नहीं है।
आरजेडी खेमे में आक्रोश
तेज प्रताप के पत्र की खबर मिलते ही आरजेडी कार्यकर्ताओं में रोष है। राबड़ी आवास (10 सर्कुलर रोड) के बाहर कार्यकर्ताओं का जमावड़ा और चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। समर्थकों का कहना है कि सरकार जानबूझकर उनके नेताओं को परेशान कर रही है या उनकी सुरक्षा की अनदेखी कर रही है ताकि वे जनता के बीच न जा सकें।
सोशल मीडिया पर भी समर्थकों ने मोर्चा खोल दिया है। वे सम्राट चौधरी और बिहार पुलिस से सीधे सवाल पूछ रहे हैं। यह मामला अब केवल एक पत्र तक सीमित नहीं रहा, बल्कि ‘आरजेडी बनाम एनडीए’ की नाक की लड़ाई बन गया है।
खतरे की वजह: राजनीति या रंजिश?
बिहार की राजनीति को करीब से समझने वाले वरिष्ठ पत्रकार बताते हैं कि यहां राजनीति और अपराध की रेखाएं कई बार धुंधली हो जाती हैं। “पूर्व जेडीयू नेता” शब्द का इस्तेमाल बहुत सोच-समझकर किया गया है। यह संभव है कि वह नेता अब किसी और दल में हो या निर्दलीय हो।
तेज प्रताप ने जिस तरह से कार्रवाई की मांग की है, उससे लगता है कि उनके पास कुछ ठोस सबूत भी हो सकते हैं। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में यह भी कहा है कि अगर प्रशासन ने समय रहते कदम नहीं उठाए, तो वे इस मामले को लेकर जनता की अदालत में जाएंगे।
Main Point: मुख्य बिंदु: तेज प्रताप ने चेतावनी भरे लहजे में कहा है कि यदि उनकी सुरक्षा सुनिश्चित नहीं की गई और कोई अनहोनी होती है, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी राज्य सरकार और गृह विभाग की होगी। यह बयान भविष्य की किसी भी घटना के लिए सरकार को ‘कटघरे’ में खड़ा करने की तैयारी है।
आगे क्या होगा?
अब सबकी निगाहें गृह विभाग की रिपोर्ट पर टिकी हैं। क्या सम्राट चौधरी राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता को भुलाकर ‘राजधर्म’ निभाएंगे? क्या तेज प्रताप को जेड प्लस (Z+) या वाई (Y) श्रेणी की अतिरिक्त सुरक्षा मिलेगी? बिहार में सुरक्षा गार्डों की संख्या रसूख (Status Symbol) का पैमाना भी मानी जाती है।
फिलहाल, पटना पुलिस ने एहतियातन गश्त बढ़ा दी है। आने वाले कुछ दिन बिहार की राजनीति के लिए काफी अहम होने वाले हैं। अगर जांच में खतरे की बात सच साबित होती है, तो उस ‘अज्ञात’ नेता पर गाज गिरना तय है। लेकिन अगर यह महज वहम निकला, तो एनडीए इसे विपक्ष का ‘विक्टिम कार्ड’ बताकर खारिज करने में देर नहीं लगाएगी। बहरहाल, इस एक पत्र ने पटना की सर्दी में सियासी गर्मी जरूर बढ़ा दी है।
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